हनुमानजी को कितने देवताओं की शक्ति प्राप्त थी।
दोस्तों शास्त्रों के अनुसार रुद्रावतार हनुमानजी के पास कई तरह की शक्तियां और वरदान प्राप्त थे। जिसकी वजह से हनुमानजी आज भी अमर है।
सूर्य देव:
हनुमानजी सूर्य देव के शिष्य थे, इसलिए सूर्य देव ने उनकी शिक्षा के समय हनुमान को अपने तेज का सौवां अंश दिया था। इस वरदान को प्राप्त करने के बाद हनुमान जी के बल सीमा नहीं रही। इनके सामने कोई भी अन्य व्यक्ति नहीं टिकने की क्षमता नहीं रख सकता। साधारण मनुष्य तो इनके तेज से ही भस्म हो जाता था।
यम देव:
मृत्यु लोक के धर्मराज यम ने भी हनुमानजी को एक वरदान दिया था, कि हनुमानजी को कभी भी यम का शिकार नहीं होना पड़ेगा,
कुबेर :
भगवान कुबेर ने हनुमान को किसी भी युद्ध में परास्त ना होने के लिए हनुमान जी को गदा भेट की थी,
महादेव:
शिव के अंशवतार होने के कारण हनुमानजी पर किसी भी अस्त्र और शस्त्र से ना मरने का वरदान था। यहाँ तक महादेव के त्रिशूल का भी हनुमानजी पर कोई असर नहीं होता।
इंद्र:
इंद्र से युद्ध के बाद उनके व्रज से हनुमानजी पर भविष्य में कोई असर नहीं पड़ेगा ऐसा वरदान प्राप्त था,
विश्कर्मा:
भगवान विश्वकर्मा ने उनके द्वारा बनाये गए, किसी भी सस्त्र का हनुमानजी पर कोई असर नहीं होगा ऐसा वरदान दिया, यानि की विश्व में ऐसा कोई भी अस्त्र नहीं बना जो बजरंगबली को छू कर उनके शरीर में पसार हो जाये।
ब्रह्माजी:
जगत गुरु ब्रम्हाजी ने हनुमानजी को दीर्घायु होने का वरदान दिया था। मतलब वे अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर कहीं भी जा सकते हैं। इसी वरदान की वजह से हनुमानजी विशाल काय समुन्द्र को लांग गए थे। और लक्ष्मण के लिए जड़ी बूटी लेन में सफल रहे थे।
कोई टिप्पणी नहीं: