क्यों नारायण हमेशा लेटे हुए रहते है। क्या है इसकी कहानी...?
क्यों नारायण हमेशा लेटे हुए रहते है। क्या है इसकी कहानी...?
एक बार राजा बलि नाम के असुर ने अपने पराक्रम और बल से तीनो लोको पर अधिकार जमा चुके थे। जिस कारण से सभी देवी-देवताओं में हडकंप मच गया था। तब राजा बलि से रक्षा के लिए सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए, तब प्रभु ने कहा इस विपदा से निपटने के लिए में देवमाता अदिति के यहां बौने वामन ब्राम्हण के रूप में जन्म लूंगा। यह भगवान विष्णु का पांचवा मानव अवतार था।
एक दिन वामन देव राजा बली के यहाँ जब दान मांगने गए, तो बलि ने कहा हे श्रेस्ट महान ब्राह्मण आपको क्या चाहिए, में आपकी क्या मदद कर सकता हु, तब प्रभु ने कहा मुझे 3 गज जमीन चाहिए, तब राजा ने कहा है ऋषिवर आप अपने पैरों से माप लीजिये, जितना मापोगे उतनी जमीं आपको द्दे दूँगा। तब प्रभु ने अपना विराट रूप धारण कर लिया। जिसमे प्रभु ने पृथ्वी समेत पूरे ब्रम्हाण्ड और स्वर्ग को 2 कदम में माप लिया, तीसरे कदम के लिए जब कुछ बचा ही नहीं, तब भगवान ने महाबली से कहा हे दानेश्वर में अपना तीसरा पैर कहा रखु। मेरे दोनों पैर में ही सारा ब्रम्हाण्ड आ गया है। तब राजा बलि ने प्रभु को तीसरा पैर उन्हें अपने सिर पर रखने को कहा। इस उदारता और भावुक भक्ति को देखकर भगवान विष्णु ने उनसे वरदान मांगने को कहा, तब राजा बलि ने भगवान को अपने साथ पाताल लोक रहने को कहा।
जिसके बाद माता लक्ष्मी ने एक भिक्षुक का रूप धारण कर उनसे हरी को अपने साथ ले जाने को कहा। उसके बाद से हरी साल के 4 महीने पाताल लोक में अपने भक्त के पास विश्राम करते है। इसीलिये नारायण पाताल लोक में विश्राम किये नजर आते है।
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