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आपने जन्माष्टमी की कहानी तो कई बार सुनी होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे छुपे वो 7 गहरे रहस्य जो आपके जीवन को बदल सकते हैं? इस ब्लॉग में जानिए!"


  


 यह तो आप सब जानते है। की भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में उनके मामा कंस की जेल में हुआ था। लेकिन क्या आपको पता है।  एक दिन आकाशवाणी से मामा कंश को पता चला था कि देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान उसकी मृत्यु का कारण बनेगी, इसलिए उसने अपनी बहन और बहनोई को जेल में कैद कर लिया था।

लेकिन वो कहते हे ना की जब मौत सामने दस्तक दे जाये तब किसी की नहीं चलती ठीक ऐसा ही हुआ जब मथुरा की काल कोठरी में, जब घनघोर अंधेरा छाया था, तब भगवान विष्णु के आदेश से एक दिव्य बालक श्री कृष्ण का जन्म हुआ, तब एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसपे विश्वाश कर पाना मुश्किल है। 

उस वक्त जेल के ताले और बेड़ियाँ अपने आप खुल गईं, और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव, शिशु कृष्ण को एक टोकरी में वसुदेव पिता के हृदय में भय और प्रेम लिए, उस नन्हे कृष्ण को एक टोकरी में छुपाकर निकल पड़े। कारागार के द्वार स्वयं ही खुल गए, जैसे कोई अदृश्य शक्ति मार्ग बना रही हो। यमुना नदी, उफनती लहरों के बावजूद, उनके चरणों को स्पर्श कर शांत हो गई, मानो बाल गोपाल को प्रणाम कर रही हो। घनघोर रात में, तारे टिमटिमाते साक्षी बने इस अद्भुत यात्रा के। रास्ते में, भारी बारिश से बचाने के लिए, शेषनाग ने अपने फन से उनकी रक्षा की, और यमुना नदी ने उनके लिए रास्ता बना दिया। वसुदेव, यमुना पार कर, गोकुल में अपने मित्र नंद और यशोदा की गोद में उस अद्भुत बालक को सौंप आए। वह रात, साधारण नहीं थी, वह कान्हा के आगमन की रात थी।

वासुदेव ने शिशु कृष्ण को यशोदा की नवजात बेटी के साथ बदल दिया और वापस जेल लौट आए। जब कंस को आठवीं संतान के जन्म की खबर मिली और वह जेल में आया, तो उसने बच्ची को मारने की कोशिश की, लेकिन वह देवी दुर्गा के रूप में प्रकट हुई और उसे चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला पहले ही जन्म ले चुका है। 

दोस्तों इस कहानी से पता चलता हे की जब भगवान को  संघर्ष करके जन्म लेना पड़ा था। और कई चुनोतियाँ का सामना करना पड़ा था। तो फिर मनुष्य तो साधारण इंसान है। वह क्यों भूल जाता हे की हमारे जीवन में इतनी परेशानियां क्यों लिखी भगवान ने।

मेरे साथ आप भी बोलिये हाथी घोडा पालकी जय कन्हिया लाल की। ।


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